में चिडियाँ बाबा तेरे आँगन की….
पियारी
हुँ पर मईया की ….
एक
सवाल तेरी चिडियाँ का…… है कोई जवाब मेरे सवालों का….?
पुजी
जाती हुँ ओर पैदा होते मार दी जाती हुँ…..
अगर
मईया ने बचाया तो बाहर नोच दी जाती हुँ…
बाहर
से बची तो अपनो में फँस जाती हुँ…..
अपनो
ने बचाया तो ससुराल में जला दी जाती हुँ…
जब
माँ बनती हुँ तो बेटे की ओर बेटियों के लिये तरस जाती हुँ….
बेटी
की माँ बनी तो रानी पर बेटे की माँ नोकरानी बनती हुँ….
जब
बेटी बिदा होती है तो आँखे नम होती है पर बेटा बिदा होता है तो सुख जाती हुँ……
अपनी
खुशी पुरी जिन्दगी ढुढ़ती रहती हुँ पर ओरों की खुशी में जीये जाती हुँ…..
बनती
हुँ सबका सहारा पर एक सहारे के लिए तरस जाती हुँ…..
जब
बुड़ी आँखे ढुढ़ती हे किसी को…” तो बेटी को पाती हुँ”……
No comments:
Post a Comment