तुम और मैं
तुम स्वेच्छाचारी , मुक्त पुरुष ,
मै
प्रकृति , प्रेम जंजीर ।
तुम मृदु मानस के भाव,
और
मैं मनोरण्जनी भाषा।
तुम वर्षो के बीते वियोग,
मै
हुँ पिछली पहचान
तुम प्राण और मै काया,
तुम
शुद्ध सच्चिदानन्द ब्रह्म ,
मै मनमोहिनी माया।
तुम
नभ हो ,मै नीलिमा।
तुम पथिक दुर के श्रान्त ,
और
मै बाट जोहती आशा
तुम भवसागर दुस्तार ,
पार
जाने की मै अभिलाषा
तुम आशा के मधुमास ,
और
मै पिक- कल- कुजन तान
तुम विमल ह्रदय उच्छ्वास
और
मै कान्त –कामिनी कविता
तुम प्रेम और मै शान्ति,
तुम
नभ हो मै नीलिमा
तुम पथ हो, मै हुँ रेणु
तुम हो राधा के मनमोहन
मै
उन अधरों की वेणु
तुम रण-ताण्डव उन्माद नृत्य
मै
सुन्दर मधुर नुपुर- ध्वनि
तुम नाद वेद ऊँकार सार
मै
कवि श्रंगार –शिरोमणि
तुम शिव हो, मै हूँ शक्ति।
तुम
रघुकुल गौरव रामचन्द्र
मै सीता अचला भक्ति।
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