जब
हम तुम दोनों साथ चले
सुख
दुख लेकर जीवन पथ पर
कृश
काँटों से आहत उर को
आपस
में सहला-सहला कर
पर,
अनजाने में,तुमने क्यो सारे दुख छीन लिए
तुमनें
क्यो काँटे बीन लिए
आधे
पथ तुम ले जाओगी
क्या
तुमनें सोचा था मन में
अंतिम
मंजिल मै, ले जाता
निर्जन
वन के सूनेपन में
पर,
हाय कहाँ पर मध्य मिला, पग सह न सके गतिहीन किए?
तुमने
क्यो काँटे बीन लिए?
