‘ऊँ’ शब्द का उच्चारण एक अलौकिक अनुभूति है। प्रातःकाल
सूर्योदय के पूर्व ब्रह्म मुहुर्त में ईश्वर के समक्ष हाथ जोड़कर बैठ जाए, फिर ‘ऊँ’
शब्द का उच्चारण करे, जितना लम्बा उच्चारण आप कर सकते है, कीजिए। आपको एक अलौकिक अनुभूति
का अहसास होगा।आपके अन्दर एक शक्ति पहले से
विद्यमान है, दुसरी शक्ति सारे ब्रह्माण्ड में ,आकाश में विद्यमान है, और एक शक्ति
‘ऊँ’ का उच्चारण करने पर पैदा होती है।जब ये तीनों शक्ति आपस में टकराती है, तब एक
नई ऊर्जा पैदा करती है। जो शक्ति आपमें पहले से मौजुद है, वह सुप्तावस्था मे होती है,
धीरे-धीरे वह शक्ति जाग्रत होती है। और ऊँ शब्द का उच्चारण करने पर शरीर में एक नई
स्फुर्ति , एक नई ऊर्जा उत्पन्न होती है।सूर्योदय से पूर्व जो समय होता है, वह ब्रह्म
मुहुर्त कहलाता है, यह सबसे श्रेष्ठ समय होता है। इस समय किया हुवा उच्चारण सबसे अधिक
फलदायी होता है। जब आप पुरी तरह तल्लीन हो जायेगे,फिर आप ‘ऊँ’ का बहुत लम्बा उच्चारण
करें, धीरे- धीरे आपका शरीर ,सुक्ष्म शरीर पृथ्वी से ऊपर उठने लगेगा। तब आपको एक दिव्य,
अलौकिक अहसास की अनुभूति होगी। एसी अनुभूति, जिसको आप सिर्फ महसुस कर सकते है. शब्दों
में उसका बयान नही कर सकते। इससे मन प्रसन्न रहता है, शरीर में नई स्फुर्ति आती है,
आपकी सोच सकारात्मक रहती है।अतः प्रतिदिन करीब ३० मिनट आप ईश्वर के समक्ष बैठकर ‘ऊँ’
शब्द का उच्चारण करे। बहुत जल्द आपको उसका प्रतिफल महसुस होगा।
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