Wednesday, 25 September 2013

सप्त श्लोकी गीता


सम्पूर्ण गीता पड़ना प्रतिदिन गीता का एक अध्याय पड़ना भी थोड़ा मुश्किल काम है। अतः संक्षेप में मात्र सात श्लोको में सम्पूर्ण गीता समाहित है। प्रतिदिन इन सात श्लोक पड़ने से सम्पूर्ण गीता पड़ने का फल प्राप्त होता है।
ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन् मामनुस्मरन्।
यः प्रयाति त्यजन् देहं स याति परमां गतिम्।(१)
स्थाने ह्रषीकेश  तव प्रकीर्त्या , जगत् प्रहष्यत्यनुरज्यते च।
रक्षांसि भीतानि दिशो द्रवन्ति , सर्वे नमस्यन्ति च सिद्धसंघाः।(२)
सर्वतः पाणिपादं तत्सर्वतो अक्षिशिरोमुखम्।
सर्वतः श्रुतिमल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति।(३)
कवि पुराणमनुशासिता रमणोरणीयांसमनुस्मरेद्यः।
सर्वस्य धातारमचिन्त्यरुपम् आदित्यवर्णं तमसः परस्तात्।(४)
ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं  प्राहुरव्ययं।
छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्।(५)
सर्वस्य चाहं ह्रदि संनिविष्ठो।
                   मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च।
वेदैश्च सर्वैरहमेव  वेद्यो ।
                   वेदान्तकृद्धेदविदेव  चाहम्।(६)
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।
मामेवैद्यप्ति युक्तैवमात्मानं मत्परायणाः।(७)
                             इति सप्त श्लोकी गीता सम्पूर्णः

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