जय श्री गणेश, श्री गणेश जी को कोटि कोटि नमन, नर, एवं नरोत्तम मनुष्यों में श्रेष्ठ श्री नारायण जी को नमस्कार करके देवी सरस्वती की स्तुति करते हुए ओजमयी वाणी में बोले - रघुवंशतिलक कौशल्यानंदन श्री राम की जय हो।रावण का विनाश करने वाले दशरथ पुत्र,कमलनयन भगवान पुंडरीकाक्ष श्री राम की जय हो। श्री सुतजी महाराज बोले
एक बार श्री नारद मुनि जो सभी का कल्याण चाहने वाले तीनों लोकों का भ्रमण करते हुए सत्यलोक में पहुंचे । वहां पर अलौकिक मुर्ति का दर्शन किया जिसका ऋषियों के द्वारा स्व निर्मित सुंदर श्लोकों के द्वारा स्तुति गान किया जा रहा था , तथा तीनों लोकों में जिसका प्रकाश फैला हुआ था ऐसे देदीप्यमान सभामण्डप को देखा
मार्कण्डेय आदि मुनियों के द्वारा बार बार स्तुति गान किया जा रहा था, तथा सरस्वती के साथ विराजमान सम्पूर्ण अर्थं से युक्त गुढ ज्ञान को जानने वाले श्रीं ब्रह्मा जी , सभी भक्तों को अभीष्ट फल प्रदान करने वाले चतुर्मुख भगवान जगन्नाथ को मुनिश्रेष्ठ श्री नारद जी ने प्रसन्न होकर दण्डवत प्रणाम किया । तब तीनों लोकों में श्रेष्ठ स्वयंभू श्री ब्रह्मा जी प्रसन्न होकर मुनि से बोले - से मुनि श्रेष्ठ आप क्या पुछना चाहतें हों कृपया बताएं।तब कानों को प्रिय लगने वाले वचनों को सुनकर नारदजीसै
श्री ब्रह्मा जी बोले - हे मुनि श्रेष्ठ जो तुमने सुना वह बहुत पहले पूर्व में मेरे द्वार कहा गया था।इस प्रकार है मुनियों में श्रेष्ठ
एक मात्र तुम ही सुनने योग्य हो
में तुम पर कृपा करके उस रहस्य को कहता हूं।
कलियुग के प्राप्त होने पर पुण्यों को अर्जित करने वाले मनुष्यो का अभाव होगा।लोग दुराचार में लीन रहने वाले, तथा सत्य से विमुख होगे ,दुसरो की निंदा में लगातार लीन रहने वाले, तथा दूसरों के धन को प्राप्त करने की अभिलाषा रखने वाले, एवं दुसरो की स्त्रियों में आसक्त रहने वाले तथा मन से दुसरो की हिंसा में लगे रहने वाले,देहरुपी आत्मा की दृष्टि को नहीं पहचानने वाले मूर्ख, नास्तिक, बुद्धि का विनाश करने वाले, माता पिता के प्रति किये जाने वाले कर्म से विमुख, स्त्री के प्रति आसक्त काम से विमुख दरिद्रता को प्राप्त करेंगे। ब्राह्मण भी लोभग्रस्त होकर वेदों का विक्रय करके जीवन यापन करने वाले धनार्जन की प्राप्ति के लिए समस्त विद्या का नाश करके,मद में चूर, हमेशा धन में ही मोहित रहेंगे । अपनी जाति के कर्मों का त्याग कर दुसरो के भी यश का नाश करने वाले पापी होंगे । क्षत्रिय और वैश्य भी अपने धर्मो का नाश करने वाले होंगे।इस प्रकार ब्राह्मण भी क्षुद्र वाक्यों के द्वारा ग़लत आचरण में तत्पर रहेंगे
इस प्रकार कलियुग में होने वाले घोर पापो का वर्णन श्री ब्रह्मा जी ने बहुत पहले ही वर्णित कर दिया था,वास्तव में आज सब कुछ घटित हो रहा है।